जागता झारखंड संवाददाता,शहादत अली नारायणपुर , जामताड़ा : कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसा ही एक मिसाल पेश किया है झारखंड के जामताड़ा जिला अंतर्गत नारायणपुर प्रखंड के मिज़ापुर चिहूंटिया गांव की जाहिदा खातून ने। सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली जाहिदा ने कड़े संघर्षों और सीमित संसाधनों के बावजूद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से बीए-एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर देशभर की लॉ एंट्रेंस परीक्षा में ऑल इंडिया 64वीं रैंक हासिल की है। जाहिदा की इस कामयाबी से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र में खुशी की लहर है। मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाली जाहिदा ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा न तो हालात की मोहताज होती है और न ही पहचान की। उनकी यह उपलब्धि हर उस बेटी के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई है, जो कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहती है। जाहिदा का कहना है, मेरी कामयाबी हर उस लड़की को समर्पित है, जिसे समाज ने कमजोर समझा। मैं अब मजलूमों की आवाज बनकर न्याय की लड़ाई लड़ूंगी। जाहिदा के पिता वाहिद खान मोटर मैकेनिक हैं और माता जुबेदा खातून एक गृहिणी हैं। उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिता वाहिद खान ने कहा, बेटी ने हमारे सपनों को नई उड़ान दी है। हमने संसाधनों से नहीं, हौसले से उसका साथ दिया है। जाहिदा शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं। दसवीं कक्षा में 93% अंक प्राप्त कर जिला टॉपर बनी थीं, वहीं इंटरमीडिएट में 97% अंक लाकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ऑल यूनिवर्सिटी स्तर पर सातवां स्थान हासिल किया था। एएमयू की इंटर्नल एलएलबी परीक्षा में चयन के बाद उन्होंने अपने हुनर और समर्पण से ऑल इंडिया 64वीं रैंक प्राप्त कर पूरे देश में क्षेत्र का नाम रौशन किया है। अब जाहिदा का सपना है कि वे एक सफल वकील बनकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करें। उनकी इस यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि बेटियाँ अगर ठान लें तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं।








