जागता झारखंड संवाददाता,शहादत अली नारायणपुर (जामताड़ा) नारायणपुर प्रखंड क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली प्रतिभाशाली, मधुर आवाज़ और आकर्षक अंदाज़ वाली शायरा रोशन हबीबा रोशनी आज उर्दू मुशायरों के आसमान पर एक चमकता हुआ सितारा बन चुकी हैं। उनकी शायरी में दर्द भी है, संदेश भी, भावनाएं भी और कला की परिपक्वता भी। यही कारण है कि उन्होंने देशभर के मुशायरों में अपनी एक अलग और खास पहचान बना ली है।रोशन हबीबा रोशनी एक ऐसी युवा शायरा हैं जिन्होंने न सिर्फ अपनी रचनात्मकता से श्रोताओं का दिल जीता है, बल्कि अपने अनोखे तरन्नुम से भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। उनके कलाम में तहज़ीब, मोहब्बत, खालिस जज़्बात और सामाजिक चेतना का खूबसूरत संगम देखने को मिलता है। मुशायरा प्रेमी उनकी मौजूदगी को खुशी की निगाह से देखते हैं और उनके शेरों पर भरपूर दाद देते हैं। अब तक वे देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित दर्जनों मुशायरों में शिरकत कर चुकी हैं, जहां उनकी मौजूदगी ने हर कार्यक्रम को सफल बनाया है। उनके कलाम को श्रोता न सिर्फ पसंद करते हैं बल्कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स जैसे फ़ेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर उनकी वीडियो लाखों बार देखी और साझा की जा चुकी हैं। खास बात यह है कि उनकी लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी उनके कलाम को सराहा जा रहा है। अपनी व्यस्तताओं के बावजूद रोशनी का साहित्य से गहरा लगाव है। वह आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मिसाल बनकर उभरी हैं कि कैसे जुनून, मेहनत, ईमानदारी और समर्पण से अपनी एक अलग पहचान बनाई जा सकती है। वह न सिर्फ़ उर्दू शायरी को बढ़ावा दे रही हैं बल्कि महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा बनकर सामने आई हैं। साहित्यिक जगत का मानना है कि अगर उनका यही सफर जारी रहा तो आने वाले दिनों में रोशन हबीबा रोशनी का नाम उर्दू जगत की उन प्रतिष्ठित आवाज़ों में शुमार होगा, जिन पर पूरे देश को गर्व होगा।








