जागता झारखंड दुमका ब्यूरो : सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. बिमल प्रसाद सिंह का कार्यकाल आज को समाप्त हो रहा है। बता दें है कि प्रो. सिंह न केवल प्रतिकुलपति के रूप में कार्यरत रहे, बल्कि लगभग दो वर्षों तक विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार भी कुशलतापूर्वक संभाला। इस दौरान जब विश्वविद्यालय कोविड-19 महामारी और प्रशासनिक अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रहा था, तब उन्होंने जिम्मेदारी संभालते हुए विश्वविद्यालय को न केवल स्थिरता दी, बल्कि इसे प्रगति के पथ पर भी अग्रसर किया।
प्रो. सिंह ने कुलपति का कार्यभार उस समय संभाला जब विश्वविद्यालय में कोविड के कारण सभी शैक्षणिक सत्र अनियमित हो गए थे। परीक्षा कैलेंडर अस्त-व्यस्त था और छात्रों की भविष्य की राहें अनिश्चित थीं। इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में उन्होंने लगातार परीक्षाओं का आयोजन कराया, परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को केंद्रीकृत किया और प्रश्नपत्र निर्माण की प्रणाली में पारदर्शिता लाते हुए इसे भी केंद्रीकृत किया। इसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय के सत्र लगभग नियमित हुए और छात्रों को समय पर परिणाम मिलना प्रारंभ हुआ।
प्रो. सिंह के कार्यकाल में छात्र सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ। जहाँ पहले माइग्रेशन, मूल प्रमाण पत्र, अंकपत्र आदि प्राप्त करने के लिए छात्रों को कई दिनों तक विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब आवेदन करने के दिन ही अधिकतर दस्तावेज़ उपलब्ध करा दिए जाते हैं। यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार रहा, जिससे छात्रों में विश्वविद्यालय के प्रति विश्वास बढ़ा।
शोध की गुणवत्ता सुधार हेतु पीएचडी को लेकर कई निर्णायक कदम उठाए गए। पीएचडी ओएसडी की नियुक्ति, प्लैगरिज़्म जांच के लिए नए सॉफ्टवेयर की व्यवस्था, शोध गंगा और शोध गंगोत्री में शोधप्रबंध एवं सिनोप्सिस की अनिवार्य अपलोडिंग, शोधार्थियों से तिमाही प्रगति रिपोर्ट की माँग – ये सभी पहल उनके कार्यकाल में हुईं। इसके अतिरिक्त, मौखिक परीक्षा के दिन ही पीएचडी का परिणाम घोषित करने की नई परंपरा भी स्थापित की गई। यही नहीं कई रास्ट्रीय सेमिनार भी उनके कार्यकाल में आयोजित किए गये और उनके प्रयास से विवि में पहली बार्र आ ई एस एस एन नंबर के साथ शोध जोर्नल भी नियमित प्रकशित हो रहे है।
प्रो. सिंह के कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सभी विषयों के सिलेबस को नए प्रारूप में पुनर्निर्मित कर लागू किया गया। इससे पाठ्यक्रम समयानुकूल एवं रोजगारोन्मुख हुए। साथ ही बतौर प्रतिकुलपति और प्रभारी कुलपति उन्होंने अपने कार्यकाल में दो दीक्षांत समारोह का भी सफल आयोजन कराये।
साथ ही शिक्षकों की पदोन्नति से संबंधित लंबे समय से लंबित मामलों में भी त्वरित कार्रवाई की गई, जिससे वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों को राहत मिली। वर्ष 2008 बैच के शिक्षकों की प्रोन्नति से संबंधित फाइलें, जो वर्षों से लंबित थीं, एक विशेष पहल के तहत आगे बढ़ाई गईं।
प्रो. सिंह के कार्यकाल में विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में अनेक संरचनात्मक विकास कार्य संपन्न हुए। प्रशासनिक भवन के सामने सौंदर्यीकरण, ओपन थियेटर का निर्माण, खेल मैदान की व्यवस्था, परिसर में सोलर पैनल प्रणाली की स्थापना, मुख्य मार्ग पर स्ट्रीट लाइट आदि कार्यों ने विश्वविद्यालय के वातावरण को आधुनिक और सुविधाजनक बनाया।
सरकार और राजभवन के निर्देश पर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ की गई, लेकिन केवल सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय और बीबीएमकेयू ने समयबद्ध ढंग से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की। एसकेएमयू में लगभग 240 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति कर नवगठित महाविद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था सुचारू की गई। इससे परीक्षाओं के संचालन और मूल्यांकन कार्य में भी कॉलेजों को सहयोग मिला। इसके साथ ही एनसीटीई की मान्यता प्राप्त करने हेतु पाँचों बीएड कॉलेजों में 33 बीएड शिक्षकों की नियुक्ति भी प्रो. सिंह के प्रयास से संभव हो सकी।
विश्वविद्यालय के वर्षों से लंबित गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन निर्धारण संबंधी मुद्दों का समाधान भी उनके कार्यकाल में हुआ। इसके लिए उन्होंने सरकार के संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष शिविर आयोजित कराया। आज विश्वविद्यालय के लगभग सभी कर्मचारी सातवें वेतनमान का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
प्रो. सिंह के नेतृत्व में कई शैक्षणिक और सांस्कृतिक नवाचार भी देखने को मिले। संथाली भाषा में स्पोकन कोर्स की शुरुआत, गोड्डा कॉलेज में संथाली पीजी कोर्स का आरंभ, दिघी परिसर में तीन स्नातकोत्तर विभागों का स्थानांतरण, सात नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत, तथा परिसर में सुविधा केंद्र की स्थापना जैसे अनेक कार्य उनके कार्यकाल में हुए। साथ ही, पाठ्यक्रमों के सिलेबस को भी अपडेट किया गया जिससे वे अधिक व्यावहारिक और समयानुकूल बने।
राजभवन से सतत समन्वय, सीमित अधिकारों में किया प्रभावी कार्य-
हालाँकि वे स्थायी कुलपति नहीं थे, फिर भी उन्होंने राजभवन से निरंतर पत्राचार करते हुए विश्वविद्यालय के हित में सभी आवश्यक अनुमति प्राप्त की। छात्रों, शोधार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने और समाधान निकालने में वे सदैव तत्पर रहे। उनकी छवि एक दृढ़, कठोर लेकिन निष्पक्ष प्रशासक के रूप में उभरी, जो विवि हित में किसी भी निर्णय को लेने में संकोच नहीं करते थे।
प्रो. बिमल प्रसाद सिंह का कार्यकाल सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा। उन्होंने अपने नेतृत्व में विश्वविद्यालय को अकादमिक उत्कृष्टता, प्रशासनिक पारदर्शिता, शोध में गुणवत्ता और सामाजिक जवाबदेही के नए मानक दिए। विश्वविद्यालय की छवि को सुदृढ़ करते हुए उन्होंने संताल परगना की शैक्षणिक आकांक्षाओं को मजबूती प्रदान की। आज उनके सेवा का अंतिम दिन है। उनके पश्चात प्रतिकुलपति का पद एक बार पुनः रिक्त हो जाएगा। विश्वविद्यालय परिवार उनके अथक योगदान को ससम्मान याद रखेगा।








