पलामू के पाकी में दो समुदाय के बीच जो घटना घटी अगर पुलिस मुस्तैद रहती तो यह घटना नहीं होती, अधिवक्ता शीश आलम
अल्पसंख्यक समाज आज भी डरे और सहमे हुए हैं।

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पलामू के पांकी में दो समुदाय के बीच हुए हिंसक झड़प के मामले में पुलिस की पक्षपातपूर्ण रवैया की शिकायत रांची के अधिवक्ता सैयद शीश आलम ने झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग रांची में की है। श्री आलम ने कहा कि यदि पुलिस वक्त रहते उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करती तो दोनो समुदायों के विरुद्ध झड़प नहीं होती। बहुसंख्यक समुदाय के कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा अवैध एवम जबरदस्ती तरीके से पांकी मस्जिद रोड में तोरण द्वार लगाने की कौशिश कर रहे थे। स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने उस स्थान पर तोरण द्वार लगाने से मना किया, किंतु वे लोग पुलिस की बातों को नजरंदाज कर दिया। और पुलिस के सामने ही उपद्रवी लोग मस्जिद पर पत्थर फेंके। पुलिस तमाशबीन खड़ी देखती रही। कई घर और दूकान जला दिए गए। अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोग दहशत में है और अपने आपको असहाय महसूस कर रहे हैं। झारखंड सरकार मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो को सुरक्षा देने में असफल रही है।
श्री आलम ने झारखंड राज्य के मानवाधिकार आयोग से लिखित आवेदन देकर मांग की है कि घटना की जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा पुलिस की भूमिका की भी जांच हो। पुलिस से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि असामाजिक तत्वों को क्यों नहीं रोका गया, जो उनकी उपस्थिति में मस्जिद में पत्थर फेक रहे थे देखा जाए तो अगर मौजूद पुलिस उचित कार्रवाई करती तो इस तरह का हादसा नहीं होता।

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