जागता झारखंड हजारीबाग : बुधवार को गद्दोघर, कदमा गुलाम दस्तगीर के निवास स्थान (दौलत कदे) पर एक भव्य ‘बज़्म सरकार-ए-दो जहां’ का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ शादी के पावन अवसर पर किया गया। जिसमें गद्दुघर, बलिंद, पेलावल और हजारीबाग के काफी लोगों ने हिस्सा लिया। सभा को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार एवं विशेष वक्ता हज़रत अल्लामा जाबिर हुसैन सिद्दीक़ी ने फरमाया कि हर घर में पैदा होने वाले बच्चों में बच्चियां और बच्चे ही होते हैं। मगर, कुछ बच्चियां ऐसी होती हैं जो बरसों तक मां-बाप को इसलिए याद रहती हैं क्योंकि उनकी इतनी सेवाएं (खिदमात) होती हैं, जितनी सेवाएं लड़के भी अपने मां-बाप की नहीं कर पाते हैं। इसी लिए अल्लाह के रसूल ने इरशाद फरमाया है कि बच्चियां दिल का टुकड़ा होती हैं और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की नस्ल-ए-पाक का सिलसिला भी अगर आगे बढ़ा है, तो बच्चियों से ही आगे बढ़ा है। अल्लाह पाक दुनिया के हर मुसलमान के घरों में हज़रत फातिमा-तुज़-ज़हरा की सीरत-ए-पाक (पवित्र जीवन) पर अमल करने वाली बच्चियों को पैदा फरमाए। ताकि, पूरी जिंदगी हज़रत फातिमा-तुज़-ज़हरा के जीवन पर अमल करके बच्चियां अपने वंश (नसब) और अपने घर को जन्नत का नमूना बना सकें। एक बाप अपनी होनहार और सेवाभावी बेटी की शादी के बाद बरसों तक सुकून की नींद नहीं सो पाता है। क्योंकि, होनहार और सेवाभावी बच्चियां बहरहाल बाप और मां के सुकून का जरिया होती हैं। इस महफ़िल में हाफ़िज़ आशिक़ हुसैन, हाफ़िज़ सिकंदर, क़ारी अब्दुल लतीफ़ क़ादरी, टीपू सुल्तान, ग़ुलाम दस्तगीर, अजीमुश्शान सिद्दीक़ी सहित अन्य लोग अंत तक शामिल रहे। अंत में हज़रत अल्लामा जाबिर हुसैन सिद्दीक़ी की दुआओं पर महफिल का समापन हुआ। गृहस्वामी (साहिब-ए- खाना) ने आने वाले मेहमानों का शुक्रिया अदा करके उन्हें उनके घरों के लिए रुखसत किया।








