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भाकपा(माले) कार्यालय में अंबेडकर जयंती व गुरुदास चटर्जी शहादत दिवस मनाया गया।

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जागता झारखंड : रांची भाकपा (माले) राज्य कार्यालय में आज डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती एवं वामपंथी आंदोलन के अग्रणी नेता शहीद गुरुदास चटर्जी की शहादत दिवस मनाया गया।इस अवसर पर पार्टी कार्यालय में डॉ. अंबेडकर द्वारा संविधान सभा में दिए गए अंतिम भाषण का पाठ किया गया तथा उनके विचारों को वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में रखते हुए विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में डॉ. अंबेडकर की भूमिका बुनियादी है। उन्होंने एक ऐसे समाज की परिकल्पना की थी जो समानता, न्याय और बंधुत्व पर आधारित हो।वक्ताओं ने कहा कि भारतीय समाज में जाति व्यवस्था एक गहरी जड़ें जमाए हुई दमनकारी संरचना है, जिसके खिलाफ डॉ. अंबेडकर ने आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने न केवल दलितों और वंचितों की मुक्ति की बात की, बल्कि महिलाओं की समानता और स्वतंत्रता को भी सामाजिक परिवर्तन का केंद्रीय प्रश्न माना। अंबेडकर के अनुसार, किसी भी समाज की प्रगति का आकलन महिलाओं की स्थिति से किया जाना चाहिए।शहीद गुरुदास चटर्जी को याद करते हुए कहा गया कि उन्होंने भूमाफियाओं और कोयला माफियाओं के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया और एक लोकप्रिय जननेता के रूप में उभरे। उनकी शहादत सत्ता संरक्षित माफियातंत्र द्वारा कराई गई, जो आज भी जल, जंगल, जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है। वर्तमान परिस्थिति पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज भी समाज के हर क्षेत्र—शैक्षणिक संस्थानों से लेकर प्रशासनिक ढांचे तक—जातीय भेदभाव गहराई से व्याप्त है। हाल के समय में यूजीसी से जुड़ी रिपोर्टों में भी शैक्षणिक संस्थानों में जातीय उत्पीड़न और भेदभाव की प्रवृत्ति के बढ़ने की बात सामने आई है, जो बेहद चिंताजनक है।वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़ी ताकतें देश में नफरत और विभाजन की राजनीति को बढ़ावा दे रही हैं। डॉ. अंबेडकर के विचारों के विपरीत, समाज में बहुसंख्यकवाद को बढ़ाते हुए अल्पसंख्यकों के बीच भय का माहौल बनाया जा रहा है। उनके नाम का इस्तेमाल कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है, जबकि उनकी मूल विचारधारा—समानता, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक न्याय—को कमजोर किया जा रहा है।सभा में कहा गया कि आज भी सामंती ताकतें मजबूत हो रही हैं और आरक्षण, रोजगार, महिला सुरक्षा, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं। नौजवानों को रोजगार और शिक्षा के मुद्दों से भटकाकर नफरत की राजनीति में झोंका जा रहा है। इन परिस्थितियों में डॉ. अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष को तेज करना समय की मांग है।इससे पहले रांची के धुर्वा स्थित हाई कोर्ट के सामने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया, जिसमें पार्टी राज्य सचिव मनोज भक्त, केंद्रीय कमेटी सदस्य शिवेंदु सेन, आर.एन. सिंह एवं आइसा राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ सहित अन्य साथियों ने भाग लिया।कार्यक्रम में मौजूद थे।भाकपा माले राज्य सचिव मनोज भक्त , केंद्रीय कमेटी सदस्य शुभेंदु सेन,राज्य कमेटी सदस्य R N सिंह,त्रिलोकी नाथ,नंदिता भट्टाचार्य, नेत्री शांति सेन,सुशीला तिग्गा,गीता तिर्की,एती तिर्की,सपना गाड़ी, सुमी उरांव, मीना आइंद ,आइसा नेता विजय कुमार,आइसा संजना मेहता, आदिवासी संघर्ष मोर्चा से सुदामा खलखो ,भीम साव ,महासंघ से गोपाल सिंह,वरिष्ठ साथी कुमार वरुण,अनंत प्रसाद गुप्ता ,सविता, सोहेल अंसारी,सुषमा गाड़ी,मंजू जी,अमित नायक, हरिद्वार साव सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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Author: Jagta Jharkhand

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