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कौशल विकास योजना में ‘खेल’: सीट आवंटन और भुगतान में भेदभाव का आरोप, उग्र आंदोलन की चेतावनी

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प्रतिनिधि, जागता झारखण्ड : प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 4.0) के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं और भेदभाव को लेकर विवाद अब बड़े आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। हाल ही में ऑल इंडिया ट्रेनिंग पार्टनर संगठन के नवनियुक्त उपाध्यक्ष और शशि प्राइवेट आईटीआई के संचालक शशि प्रकाश सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने योजना के संचालन पर गंभीर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सरकारी प्रावधानों के अनुसार प्राइवेट आईटीआई कॉलेजों के लिए 240 सीटें निर्धारित की गई थीं, लेकिन धरातल पर आवंटन की प्रक्रिया में भारी पक्षपात और अपारदर्शिता बरती जा रही है। जहाँ एक ओर केंद्र सरकार कौशल विकास के जरिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर चहेते संस्थानों को अनुचित लाभ पहुँचाया जा रहा है।शशि प्रकाश सिंह ने योजना की पारदर्शिता पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि कई ऐसे फर्जी संस्थानों और अपात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ दे दिया गया है जो तकनीकी रूप से प्राइवेट आईटीआई से संबद्ध तक नहीं हैं, बल्कि वे केवल ‘स्किल हब’ के नाम पर कागजों में काम कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाला और गंभीर आरोप सीटों के असमान वितरण को लेकर लगाया गया है। उन्होंने कहा कि जहाँ प्राइवेट आईटीआई के निर्धारित कोटे के विपरीत कुछ चुनिंदा और बाहरी संस्थानों को 5000 से अधिक सीटें आवंटित कर दी गई हैं, वहीं मेहनत से काम करने वाले छोटे संस्थानों को उनके हक से वंचित रखा गया है। यह विसंगति सीधे तौर पर सिस्टम में व्याप्त गहरे भ्रष्टाचार और पक्षपात की ओर इशारा करती है, जिससे वास्तविक प्रशिक्षण संस्थान आर्थिक रूप से हाशिए पर चले गए हैं।सिर्फ आवंटन ही नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी ट्रेनिंग पार्टनर्स का मानसिक और वित्तीय शोषण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भुगतान प्रक्रिया में जानबूझकर दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है, जहाँ कुछ प्रभावशाली संस्थानों को गुपचुप तरीके से पूर्ण भुगतान कर दिया गया है, वहीं छोटे प्राइवेट आईटीआई संचालकों को केवल 30 प्रतिशत की पहली किस्त देकर शेष 70 प्रतिशत राशि अनिश्चितकाल के लिए रोक ली गई है। बार-बार आधिकारिक गुहार लगाने के बाद भी बकाया राशि का भुगतान न होने से प्रशिक्षण संस्थानों के सामने स्टाफ की सैलरी और बिजली बिल जैसे दैनिक संचालन का गहरा संकट खड़ा हो गया है। इसी भेदभावपूर्ण रवैये के विरुद्ध संगठन ने बीते 4 अप्रैल को नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना देकर अपनी आवाज बुलंद की थी, लेकिन सरकार की चुप्पी ने अब आक्रोश को और बढ़ा दिया है।अब संगठन ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उपाध्यक्ष शशि प्रकाश सिंह ने केंद्र सरकार को दो-तूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते सीट आवंटन और भुगतान प्रक्रिया की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन पूरे देश में उग्र आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने अपनी बात पर विशेष जोर देते हुए यहाँ तक कह दिया कि यदि न्याय मिलने में देरी हुई, तो वे अपने हक के लिए आत्मदाह जैसा आत्मघाती कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। फिलहाल, इस बढ़ते आक्रोश ने कौशल विकास योजना के जमीनी प्रबंधन और उसकी निष्पक्षता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिसका जवाब देना अब विभाग के लिए अनिवार्य हो गया है।

Jagta Jharkhand
Author: Jagta Jharkhand

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