जागता झारखंड संवाददाता राँची : भाकपा(माले) के राज्य कार्यालय महेंद्र सिंह भवन मे फादर स्टेन स्वामी की स्मृति में “संविधान की दिशा पर संगठित हमला, बिहार में वोटबंदी और भारत का प्रत्युत्तर” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई कार्यक्रम का संचालन नंदिता भट्टाचार्य ने किया इसमें सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं बुद्धिजीवियों और छात्र-युवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।वक्ताओं ने कहा 2014 के बाद से संविधान की आत्मा और उसकी संस्थाओं पर संगठित ढंग से हमले तेज हुए हैं चुनाव आयोग जैसी संस्था जो पहले निष्पक्ष और स्वतंत्र मानी जाती थी अब सत्ता के अधीन हो चुकी है बिहार में चल रही मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को एक तरह से “वोटबंदी” में बदलने की कोशिश किया जा रहा है जिससे गरीबों दलितों घुमंतू और पलायन कर चुके समुदायों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है वोट देने के लिए ऐसे दस्तावेजों की मांग की जा रही है करोड़ों नागरिकों के पास नहीं हैं यह न सिर्फ मताधिकार से वंचित करने की साजिश है बल्कि नागरिकता पर हमला भी है वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सत्ता में आने के बाद लगातार संविधान के मूल तत्वों समाजवाद धर्मनिरपेक्षता समानता और सामाजिक न्याय को कमजोर करने पर आमादा है एनआरसी नागरिकता कानून में संशोधन वनाधिकार कानून में कटौती श्रम कानूनों की समाप्ति और नई शिक्षा नीति जैसे कदम संविधान विरोधी हैं अब संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ शब्द हटाने की बात होना सत्ता की असली मंशा को उजागर करता है, जो देश को मनुस्मृति आधारित वर्ण व्यवस्था की ओर ले जाना चाहती है फादर स्टेन स्वामी को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अंतिम सांस तक आदिवासियों और वंचितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। आज जब संविधान पर हमले हो रहे हैं, उनकी स्मृति हमें संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संगठित होने की प्रेरणा देती है। वक्ताओं ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब जनता को सड़कों पर उतरकर संविधान विरोधी ताकतों को जवाब देना होगा। संगोष्ठी का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि बिहार की जनता लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक लड़ाई जारी रहेगा मौके पर भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त,किरण, तारामणि, कुमार वरुण,भारत भूषण चौधरी, विनोद कुमार शुभेंदु सेन इम्तेयाजअहमद सुब्रत चटर्जी दीनानाथ प्रवीण एलिना पीटर सहित अन्य लोग मौजूद थे।












