जागता झारखंड संवाददाता शैली आर्या रांची: सरयू राय ने झारखंड की राजनीति में एक नया समीकरण पेश करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो, राजद और भाकपा माले मिलकर राज्य में सरकार बनाए, तो वे बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं। इस प्रस्ताव के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
कांग्रेस को अलग कर सरकार बनाने का सुझाव
सरयू राय ने कहा कि जब कांग्रेस के साथ संबंधों में तल्खी बढ़ रही है, तो यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि झामुमो, राजद और माले के साथ मिलकर स्थिर सरकार बनाई जा सकती है, जिसमें वे खुद भी समर्थन देंगे।
बहुमत का पूरा गणित पेश किया
सरयू राय ने सरकार गठन के लिए पूरा आंकड़ा भी सामने रखा। उनके अनुसार, सरयू राय के अनुसार झारखंड में संभावित नए राजनीतिक समीकरण के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34 विधायक, राष्ट्रीय जनता दल के 4 विधायक, भाकपा माले के 2 विधायक, जनता दल (यूनाइटेड) का 1 विधायक और जेएलकेएम का 1 विधायक शामिल हैं, जिन्हें मिलाकर कुल संख्या 42 होती है, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है।
इस तरह कुल संख्या 42 होती है, जबकि बहुमत के लिए 41 विधायकों की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोजपा विधायक जनार्दन पासवान को साथ लिया जाए, तो आंकड़ा 43 तक पहुंच सकता है, जिससे सरकार और मजबूत बनेगी।
उन्होंने बताया कि इस तरह का सुझाव पहले जेएलकेएम विधायक जयराम महतो भी दे चुके हैं, जिसे वे आगे बढ़ा रहे हैं।
कांग्रेस का पलटवार
प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरयू राय से किसी ने समर्थन नहीं मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया में बने रहने के लिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन की सरकार मजबूत है और अपना कार्यकाल पूरा करेगी।
झामुमो ने बताया व्यक्तिगत विचार
झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय बबलू ने कहा कि सरयू राय का यह सुझाव उनका व्यक्तिगत विचार है। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने और अन्य दलों के विधायकों की संख्या का पूरा ज्ञान है और वह जनादेश का सम्मान करते हुए सरकार चला रही है।
कांग्रेस पर लगाया धोखे का आरोप
सरयू राय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने पहले बिहार और फिर असम में झामुमो को छला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल अपने हितों के अनुसार गठबंधन करती है। अगर उनका सुझाव माना जाता है, तो झामुमो को न कांग्रेस की जरूरत होगी और न ही भाजपा की।
राजद की संतुलित प्रतिक्रिया
राजद नेता व उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि सरयू राय की बातों में दम हो सकता है, लेकिन उनके वास्तविक इरादों को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरयू राय को पहले भाजपा से दूरी बनानी चाहिए, उसके बाद इस तरह के सुझाव देने चाहिए।
पार्टी नेतृत्व को मनाने की बात
जदयू और भाजपा के गठबंधन पर उठे सवालों के जवाब में सरयू राय ने कहा कि वे इस मुद्दे को पार्टी फोरम में उठाएंगे और नेतृत्व को इसके लिए राजी करने की कोशिश करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में अभी तक उनकी झामुमो नेताओं से कोई बातचीत नहीं हुई है।









